पंजाब का भू-जल स्तर (Groundwater Level) हर साल 1 मीटर की दर से गिर रहा है : अध्ययन

1998 और 2018 के बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 22 में से 18 क्षेत्रों में भूजल स्तर प्रति वर्ष 1 मीटर से अधिक गिर गया है।

मुख्य बिंदु

  • राजन अग्रवाल, समानप्रीत कौर और अनमोल कौर गिल द्वारा लिखित पंजाब भूजल रिक्तीकरण अध्ययन, PAU द्वारा प्रकाशित किया गया था और पिछले महीने राज्य सरकार को प्रस्तुत किया गया था। इस अध्ययन में पाया गया कि 3 से 10 मीटर तक उपलब्ध भूजल 20 वर्षों में 30 मीटर से नीचे चला गया है।

  • अनुसंधान को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय जल संसाधन और पर्यावरण ब्यूरो, कृषि ब्यूरो और केंद्रीय भूजल आयोग से भूजल स्तर के आंकड़े प्राप्त किये गये हैं।

अधिकांश जिलों में अत्यधिक दोहन

फरीदकोट, फिरोजपुर, गुरदासपुर और मुक्तसर के चार जिलों और होशियारपुर, नवांशहर, रोपड़ और मनसा के कुछ ब्लॉकों को छोड़कर, राज्य के हर क्षेत्र में भूजल का अत्यधिक दोहन किया गया है।

भू-जल की समस्या

भू-जल स्तर में कमी की समस्या 1990 के बाद शुरू हुई, लेकिन 1998 के बाद गिरावट की दर में वृद्धि जारी है। 2012 तक, स्थिति खराब हो गई और PAU द्वारा साझा की गई छवियों में उन जगहों की उपस्थिति दिखाई गई जहां जल स्तर 20 मीटर से नीचे गिर गया है। 2018 तक, राज्य के मध्य भाग में स्थिति खराब हो गई थी और भू-जल स्तर 30 मीटर से नीचे चला गया।

समस्या का कारण

किसानों की सुविधा और जरूरतों के कारण नहर सिंचाई से नलकूपों में परिवर्केतन कारण भू-जल का ह्रास हुआ है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्र संगरूर, बरनाला और पटियाला हैं, जहां वार्षिक भूजल स्तर क्रमशः 106.5 सेमी, 103.3 और 100.2 सेमी (1 मीटर प्रति वर्ष) गिर गया है। मोहाली, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, तरनतारन और लुधियाना क्षेत्रों में, भूजल स्तर हर साल क्रमशः 59.8 सेमी, 70.4, 68.4, 56.7 और 56.1 सेमी कम हो रहा है।